अभी इसी पल, हमारा ब्रह्मांड अनगिनत समानांतर ब्रह्मांडों में बंट सकता है—हर एक में आपका एक नया रूप मौजूद हो सकता है।
आपने शायद सोचा होगा कि मल्टीवर्स सिर्फ फिल्मों की कल्पना है, लेकिन क्वांटम मेकेनिक्स हमें बताती है कि यह सच भी हो सकता है। और इसी अजीब सी सोच ने कुछ लोगों को यह विश्वास दिला दिया है कि क्वांटम अमरता (Quantum Immortality) जैसी चीज़ वास्तव में संभव हो सकती है—यानी आप कभी नहीं मरते।
इस लेख के अंत तक, आप क्वांटम मेकेनिक्स को आम लोगों से कहीं बेहतर समझ पाएंगे—और शायद ये बातें आपको रातों की नींद भी उड़ा दें।
क्वांटम युग की शुरुआत
यह कहानी शुरू होती है 1900 के दशक की शुरुआत में, जब आइंस्टीन, प्लैंक और श्रोडिंजर जैसे वैज्ञानिक मिलकर क्वांटम सिद्धांत को समझने और विकसित करने में जुटे थे। यह सिद्धांत इतनी बारीकी से काम करता था कि इससे कई पुराने वैज्ञानिक प्रश्नों के उत्तर मिलने लगे।
क्वांटम मेकेनिक्स ने यह बताया कि प्रकाश एक साथ कण और तरंग दोनों की तरह बर्ताव कर सकता है। लेकिन इसी में एक अजीब बात भी सामने आई—जो कि बहुत ही रहस्यमयी थी।
शास्त्रीय भौतिकी (Classical Physics) में हर चीज़ को सटीक रूप से मापा जा सकता है। जैसे धरती की स्थिति, रॉकेट की गति या किसी वस्तु का वजन। लेकिन क्वांटम भौतिकी में चीज़ें संभावनाओं (probabilities) के आधार पर मापी जाती हैं।
कोपेनहेगन व्याख्या
1920 के दशक में नील्स बोहर और वर्नर हाइजेनबर्ग ने कोपेनहेगन व्याख्या (Copenhagen Interpretation) दी। इस व्याख्या के अनुसार, जब कोई पर्यवेक्षक (observer) किसी कण को देखता है, तो उसकी संभावनाओं की स्थिति (wave function) एक वास्तविक परिणाम में बदल जाती है—इसे “collapse” कहा जाता है।
आइंस्टीन को यह बात पसंद नहीं आई। उन्होंने कहा, “ईश्वर ब्रह्मांड के साथ पासे नहीं खेलता।”
यही सोच “श्रोडिंजर कैट” (Schrödinger’s Cat) प्रयोग की नींव बनी। इसमें एक बिल्ली को एक बॉक्स में बंद किया जाता है, और जब तक बॉक्स को खोला न जाए, वह बिल्ली “जिंदा और मरी हुई दोनों” स्थितियों में रहती है।
सवाल उठता है—क्या वास्तव में चीज़ें एक साथ दो स्थितियों में हो सकती हैं?
ह्यू एवरट और मल्टीवर्स का जन्म
1957 में, अमेरिकी भौतिक विज्ञानी ह्यू एवरट (Hugh Everett) ने एक क्रांतिकारी विचार रखा—क्या हो अगर वेव फंक्शन कभी collapse ही न होता हो?
उन्होंने कहा कि हर संभव परिणाम अपनी अलग दुनिया (Universe) में घटित होता है। उदाहरण के लिए, अगर एक इलेक्ट्रॉन बाएं या दाएं जा सकता है, तो ब्रह्मांड दो हिस्सों में बंट जाता है—एक में इलेक्ट्रॉन बाएं गया और दूसरे में दाएं।
इसे ब्रांचिंग (Branching) कहा जाता है। और चूंकि हर सेकंड अरबों कण क्वांटम निर्णय ले रहे हैं, यह ब्रांचिंग हर पल हो रही है—लगभग अनंत बार।
आपकी चेतना (Consciousness) सिर्फ एक ब्रांच पर चल रही है, जबकि आपके अनगिनत अन्य संस्करण अपनी-अपनी दुनियाओं में मौजूद हैं।
डिकोहेरेंस: वैज्ञानिक समाधान
अब एक बड़ा सवाल—अगर वेव फंक्शन कभी collapse नहीं होता, तो हमें हमेशा एक ही परिणाम क्यों दिखता है?
इसका उत्तर 1970 के दशक में आया, जिसे डिकोहेरेंस (Decoherence) कहा जाता है। जब कोई क्वांटम सिस्टम अपने वातावरण (जैसे प्रकाश, तापमान, अन्य कणों) के साथ संपर्क में आता है, तो उसकी स्पष्ट स्थिति धुंधली हो जाती है और विभिन्न संभावनाएं अलग-अलग ब्रह्मांडों में “लॉक” हो जाती हैं।
यानी हमें एक ही परिणाम दिखता है, लेकिन बाकी संभावनाएं भी दूसरी दुनियाओं में घटित होती रहती हैं।
आज के वैज्ञानिक और मल्टीवर्स
हालांकि आज भी अधिकांश वैज्ञानिक कोपेनहेगन व्याख्या को मानते हैं, लेकिन Many Worlds Interpretation (MWI) तेजी से लोकप्रिय हो रही है। आज लगभग 20% वैज्ञानिक इस सिद्धांत को मानते हैं।
और इसका एक बड़ा कारण है—क्वांटम कंप्यूटिंग।
क्वांटम कंप्यूटर और ब्रह्मांडीय गणना
क्लासिकल कंप्यूटर 0 और 1 बिट्स पर काम करते हैं। लेकिन क्वांटम कंप्यूटर क्यूबिट्स (qubits) का इस्तेमाल करते हैं, जो एक साथ 0 और 1 दोनों हो सकते हैं—इसे सुपरपोजिशन कहते हैं।
इससे क्वांटम कंप्यूटर कई गणनाएं एक साथ कर सकते हैं—एक तरह से यह अलग-अलग ब्रह्मांडों में समानांतर गणनाएं करने जैसा है।
भौतिक विज्ञानी डेविड डॉएश (David Deutsch) का मानना है कि क्वांटम कंप्यूटर की शक्ति तभी समझ में आती है, जब हम मान लें कि वे गणनाएं वास्तव में मल्टीवर्स में हो रही हैं।
क्वांटम अमरता: क्या हम कभी मरते हैं?
अब आता है सबसे विवादित विचार: Quantum Immortality यानी क्वांटम अमरता।
मान लीजिए एक कार दुर्घटना में आपके मरने की संभावना है। एक ब्रांच में आप मर जाते हैं, दूसरी में बच जाते हैं। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि आपकी चेतना केवल उसी ब्रांच को “फॉलो” करती है जिसमें आप बचते हैं।
यानी आपकी चेतना कभी भी मरने वाले रास्ते पर नहीं जाती।
यह विचार विवादास्पद है, लेकिन ह्यू एवरट के करीबी लोगों का कहना है कि उन्होंने इसे सच मान लिया था। हालांकि उन्होंने इसे कभी औपचारिक रूप से नहीं लिखा।
क्या यह सच में संभव है? शायद नहीं। लेकिन यह जरूर सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हर बार जब हम “किसी हादसे से बाल-बाल बचते हैं”, वह वास्तव में एक ब्रांचिंग मोमेंट होता है—जहां हम बस उस ब्रह्मांड में जीवित रह गए।
क्वांटम भौतिकी हमें सिखाती है कि यह दुनिया उतनी सरल नहीं जितनी दिखती है। और Many Worlds जैसी व्याख्याएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि हम किस “संभावना” में जी रहे हैं—और क्या कभी सच में मरते हैं।
अगर यह सब सही है, तो शायद हम सभी के अनगिनत रूप आज भी अनगिनत दुनियाओं में ज़िंदा हैं—बस एक अलग रास्ते पर।

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